राजनीति हास्य

वाह रे राजनीती और नेता जी
तुमने क्या रंग दिखाया
राम मंदिर की बात थी
हनुमानजी को बीच मे लाया
कोई बोले दलित कोई बोले जाट
तो कोई बोले मुसलमान है
भगवान को ही बांट चले
आखिर कैसे ये नेताओं में छिपे इंसान है
इलेक्शन है सर पे शायद इस वजह से बौखलाए हैं
और जनता को तो पहले ही अपने वादों से बेवकूफ बनाये है
सोच रहे हैं शायद फिर देंगे कोई नया फतूला
राम मंदिर तो कब का बन चुका
अब पेश करेंगे हनुमत झूला
अरे क्यों देश की जनता को वोटों में बांट रहे हो
जाति भेद के नाम पर उनके जहनो को काट रहे हो
कुर्सी तुम्हारी पक्की रहेगी
उनके हिस्से में तो लिखी बेरोजगारी है
अबकी बार झूठ के साथ फिर कौन से नए वादे की तैयारी है
बट चुका है टुकड़ो में
अब कहा देश बच पायेगा
जागो देश के लोगों
पता नही अब कौन से भगवान का नंबर आएगा

गर उठ चुके हो गिरकर तो
थोड़ी सी शर्म बरतलो
राजनीती में ना घसीटो
भगवान को भगवान की जगह रखलो….

शायरी

1:- एक कहानी सी बनी तेरी मोहब्बत
और हम किस्सा बनकर रह गए
बन्द किताबों सा रहा इश्क़ तेरा
और हम किताबों में ही बंद रह गए

2:- हो कैदी बनकर रह गए
अपने ही सताइश (घर) मे
वो गुनाह करते रहे
और सज़ा-ऐ-मौत हमको मिली

3:- क्यों चुराऊं अल्फ़ाज़ महफ़िल में गुनगुनाने को
जब तेरी गम-ऐ-मोहब्बत ही ज़िन्दगी पढ़ा गयी

4:- एक प्याज सा था इश्क़ तेरा मेरे लिए
जितने पर्दे उतरते गए उतने ही हम मरते गए

5:- वो फिर यू आये तन्हाई का आलम देने के लिये
कमबख्त एक शराब का सहारा था
उससे भी बेवफाई करा गए

गीत (ऐ रहनुमा)

ऐ रहनुमा ऐ रहनुमा

रूह में घुला हुआ सा
सांस में रमा हुआ सा
इश्क़ ये तेरा ऐ रहनुमा….

प्यास बनके बढ़ रहा है
अब्र सा बरस रहा है
इश्क़ ये तेरा ऐ रहनुमा….×2

तेरे बिना-जीना कहा
तेरे बिना-मरना यहाँ
तेरे बिना-ना एक पल
तेरे बिना-ना-मुकम्मल ये मेरा जहान

दूरियों को ख्वाब कर दे
खुद को तेरे पास कर दे
इश्क़ ये तेरा ऐ रहनुमा

लम्हा भी गुज़र ना पाये
तेरी ही तलब लगाए
इश्क़ ये तेरा ऐ रहनुमा…×2

तेरे बिना-जीना कहा
तेरे बिना-मरना यहां
तेरे बिना-ना एक पल
तेरे बिना-ना-मुकम्मल ये मेरा जहान….

ऐ रहनुमा ऐ रहनुमा…

मैं मर गया अब क्या करूँ

मैं मर गया अब क्या करूँ
मैं डर गया अब क्या करूँ
दुनिया देती है हवाला ज़िन्दगी भर खुश रहने का
डूबते डूबते बन गया दरिया अब क्या करूँ

रुकती है सांसे देखकर मंजर अब लोगो का
रिश्ते नासूर बन गए अब क्या करूँ
आता है हर चौखट पर पसीना
मैं मर गया अब क्या करूँ

मरहम भी लगाया पर
दिल का शोर चुप ना हो पाया
अब क्या करूँ
देखी है मैंने खामोश चुप्पियां दम तोड़ते हुए
मैं मर गया अब क्या करूँ

है तो दिल बहलाने को अपने पर
सुकून समझ ना किसमे है पाया अब क्या करूँ
लेते है मज़ा सब वक़्त की बेवफाई का
मैं मर गया अब क्या करूँ

पी है आज गम भुलाने को
पर कोई मुझे समझ ना पाया अब क्या करूँ
फरमाया है ताल्लुकात आपसे खुद का
तो अब आप बताओ मैं मर गया अब क्या करूँ

दुश्मन निगाहें (ग़ज़ल)

यू कत्ल मेरा कर जाए – फिर होश हम ना पाये

ढूंढे सरे राह ये – तेरी दुश्मन निगाहें

एक तलब तेरी तड़प में – रहा चैन भी ना बस में

ना ओझल हो निगाह से – तेरी दुश्मन निगाहें

आकर टकराये जाम से – लबों पर रख दे एक समा

ये ख्वाब जहन में दे जाए – तेरी दुश्मन निगाहें

तोड़ दे जर्रा जर्रा – रिश्ता दिल से धड़कन का

मजबूर मिलन को कर जाए – तेरी दुश्मन निगाहें

कतरा कतरा समेट कर – रूह का मेरे जिस्म से

भर साँसों में अपनी ले जाये – तेरी दुश्मन निगाहें

थाम कर सब हसरतें – हथेलियों के जाल में

किस्मत चुरा कर ले जाये – तेरी दुश्मन निगाहें

उम्मीद के इम्तिहान में एक ख्याल तुझको पाने का-ये बात और है हसरत तो ज़िन्दगी से एक कतरा भी नही ।

 

तवायफ

महफ़िल सजा कर महफ़िल की शाम रंगीन कर गयी

फिर एक तवायफ को दुनिया बदनाम कर गयी

खिली चेहरे पे उसके जो बेबाक सी हँसी

फिर दिल ऐ दर्द मुस्कान होंठो की कर गयी

महफ़िल सजा कर महफ़िल की शाम रंगीन कर गयी

फिर एक तवायफ को दुनिया बदनाम कर गयी

है चाहत सबको जिस्म की – पर अस्मत उसकी मर गयी

कौन पूछे हाल ऐ दिल उसका – तमाशे में फिर वो उतर गयी

लुटती इज़्ज़त दहलीज़ पर – शर्म तार तार उसकी कर गयी

देखा जो चेहरा दर्पण में – नज़रे बदनाम खुद को ही कर गयी

महफ़िल सजा कर महफ़िल की शाम रंगीन कर गयी..

एक छाव की तलाश थी – पर धूप में वो तर रही

उम्मीद में एक प्यार की – सेज बनकर बिखर रही

इस ज़िन्दगी के खेल में – और हसरतो में ताज की

शामों में किसी औऱ की – एक दाम बनकर वो रह गयी

महफ़िल सजा कर महफ़िल की शाम रंगीन कर गयी..

फिर एक तवायफ को दुनिया बदनाम कर गयी……

गीत

कभी खलती तेरी हँसी कभी खलती तेरी कमी

ना मुझसे है जुदा मुझको ले सुन जरा..

ना जा दूर तू ना जा ओ ओ ना जा दूर तू ना जा..

हर लम अधूरा सा – जर्रों में टूटा सा

वो ख्वाईशो का कल – इस पल ना पूरा सा

जो दिल मे साज़ है – वो बेआवाज है

आंखों में बस चला – एक ख्वाब अधूरा सा..

ना जा दूर तू ना जा वो ओ ओ ना जा दूर तू ना जा

लबों पे जो सजी – तेरी प्यास में ढली

है सहमी सी कही – वो जाने ज़िन्दगी

तन्हा पहेली है – हर रात अकेली है

बेचैनियां बस यहाँ – तेरी यादों में बसी

ना जा दूर तू ना जा वो ओ ओ ना जा दूर तू ना जा